
खबर का असर: एक साल बाद जागा पंचायत प्रशासन, साजादहरा में शुरू हुआ सीसी सड़क निर्माण, सचिव की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
समाचार प्रकाशित होते ही निर्माण सामग्री पहुंची, ग्रामीण बोले—अगर काम स्वीकृत था तो एक वर्ष तक क्यों रुका रहा? निष्पक्ष जांच की मांग तेज।

जीशान अंसारी की रिपोर्ट,कोटा/खोंगसरा। तुलुफ ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम साजादहरा में लगभग एक वर्ष से लंबित सीसी सड़क निर्माण कार्य आखिरकार शुरू हो गया। ग्रामीणों का दावा है कि मीडिया में मामला प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद पंचायत प्रशासन हरकत में आया और निर्माण स्थल पर सामग्री पहुंचाकर कार्य प्रारंभ कराया गया। इसे ग्रामीण “खबर का असर” मान रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य काफी पहले स्वीकृत हो चुका था, लेकिन लंबे समय तक इसे शुरू नहीं किया गया। कई बार शिकायतें करने और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। समाचार प्रकाशित होने के बाद अचानक निर्माण शुरू होने से यह सवाल उठने लगे हैं कि यदि कार्य स्वीकृत था तो इसे समय पर पूरा क्यों नहीं कराया गया।

शिकायतकर्ता अमित पाटनवार ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में अनावश्यक देरी की गई। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सुशासन दिवस सहित विभिन्न माध्यमों से शिकायतें भी की गई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि मीडिया में मामला सामने आने के बाद ही पंचायत प्रशासन सक्रिय हुआ।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत सचिव रमाकांत श्याम के पास एक से अधिक ग्राम पंचायतों का प्रभार होने के कारण विकास कार्यों की नियमित निगरानी प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में हुई देरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर एक वर्ष तक निर्माण कार्य लंबित क्यों रखा गया।

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत के अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि अब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है, लेकिन ग्रामीण केवल निर्माण शुरू होने से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि निर्माण की गुणवत्ता, कार्य की स्वीकृति तिथि, भुगतान संबंधी अभिलेख और निर्माण में हुई देरी के कारणों की भी जांच की जाए, ताकि भविष्य में विकास कार्यों में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो।















